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ब्रेकिंग न्यूज़! राजस्थान में सुशासन का भजन बजा, गहलोत सरकार के रिकॉर्ड ध्वस्त! लाखों लोगों को मिली संजीवनी

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जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी पहली ही पारी में जिस तरह सेवा और सुशासन को जमीन पर उतारा है, वह राजनीतिक गलियारों में एक नया इतिहास रच गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुए शहरी और ग्रामीण सेवा शिविर अब सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ‘जनता की दहलीज पर सरकार’ की मिसाल बन गए हैं। विपक्ष भी अंदरखाने इस एंटी-इनकम्बेंसी किलर मॉडल की तारीफ करने को मजबूर है।

अंत्योदय का लक्ष्य रिकॉर्ड-तोड़ एक्शन

अंत्योदय सबसे पहले अंतिम व्यक्ति तक सेवा के मूलमंत्र पर चल रहे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इन शिविरों ने साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो, तो प्रशासन कितना संवेदनशील हो सकता है। अब जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं, बल्कि खुद सरकार 18 विभागों की सुविधाओं का पिटारा लेकर गाँव-गाँव और शहर-शहर पहुँची है।

आँकड़े चीख-चीखकर कहानी बयां कर रहे हैं

  • 1 लाख 99 हज़ार से अधिक लोगों को ज़मीन के पट्टे मिले, जिसने गरीबों के सिर पर पक्की छत का सपना पूरा किया।
  • 2 लाख 67 हज़ार से अधिक मंगला पशु बीमा पॉलिसियां’ जारी हुईं जिससे पशुपालकों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा मिली है।
  • 1 लाख 25 हज़ार से अधिक नामांतरण के मामले और 1 लाख 56 हज़ार भू-राजस्व शुद्धिकरण के प्रकरणों का निपटारा किया गया। बरसों से अटके ज़मीन के झगड़े मिनटों में सुलझ गए।

स्वास्थ्य और सम्मान का कवच

ये शिविर केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी बड़ा काम हुआ। 17 लाख से अधिक किशोरियों और गर्भवती महिलाओं की एनीमिया की जाँच की गई – यह एक ऐसा कदम है जो राज्य के भविष्य को स्वस्थ बनाने की दिशा में उठाया गया है। 24 लाख से अधिक मरीज़ों का उपचार और 10 लाख से अधिक नागरिकों की टीबी जाँच होना बताता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का अंबार जनता के द्वार पर लगा दिया गया है।

75 हज़ार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को ‘वय वंदन कार्ड’ जारी कर उन्हें सम्मान दिया गया, जबकि 25 हज़ार से अधिक छोटे व्यापारियों के लिए स्वनिधि योजना के तहत ऋण आवेदन स्वीकृत हुए, जिससे उनकी आजीविका को बल मिला।

चाहे वह सड़कों, नालियों की मरम्मत हो या फिर रजिस्ट्री, गिरदावरी और प्रमाण पत्रों का वितरण- इन सेवा शिविरों ने दिखा दिया है कि सुशासन केवल भाषणों में नहीं, बल्कि धरातल पर नज़र आता है। मुख्यमंत्री शर्मा का यह मॉडल न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश की सरकारों के लिए एक ‘केस स्टडी’ बन चुका है।

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