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बागियों पर कार्रवाई से पीछे हटी आप

April 16, 2015 05:57 PM
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी(आप) का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वराज संवाद आयोजित कर खुली चुनौती देने वाले योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ही खत्म करने की तैयार कर ली गई थी, मगर अचानक पार्टी ने इस कार्रवाई पर आगे कदम न बढाने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि बागियों पर कार्रवाई करने से अरविंद केजरीवाल पीछे हट गये हैं। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया गया है। हाल ही में योगेन्द्र यादव ने इस तरह की किसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा था कि ऐसा करने वालों को पहले पार्टी का संविधान पढ लेना चाहिये। योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण ने जो स्वराज संवाद बैठक बुलाई थी,उसके बाद अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आप उन्हें पार्टी से ही बाहर करने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी की अनुशासन समिति योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रोफेसर, आनंद कुमार और अजित झा को कारण बताओ नोटिस भेजने की तैयारी में है। इन नेताओं को 48 घंटे के भीतर समिति के समक्ष पेश होने को कहा जायेगा। अगर वे पेश नहीं हुए, तो पार्टी उन्हें बर्खास्त कर देगी। अनुशासन समिति में आशीष खेतान, पंंकज गुप्ता और दिनेश बाघेला हैं, जो तीनों ही केजरीवाले खेमे के हैं। बुधवार को आम आदम पार्टी (आप) की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में स्वराज संवाद में हिस्सा लेने वालों पर कार्रवाई और योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण को पार्टी से निकाले जाने के विकल्पों पर विचार किया गया। इस मसले पर कानूनी राय लेने के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों के मामले में योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, अजित झा और प्रो. आनंद कुमार के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे को पार्टी की राष्ट्रीय अनुशासनात्मक कमेटी के पास भेज दिया गया है। हालांकि इन पर कार्रवाई करने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। इसके अलावा विधायक पंकज पुष्कर और हजारों समर्थकों के खिलाफ जिन्होंने स्वराज संवाद में भाग लिया, पार्टी कुछ भी बोलने से बच रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर बैठक में पीएसी के सभी सदस्यों आशीष खेतान, आशुतोष, आशीष तलवार, दिलीप मंडल और पार्टी के मीडिया प्रभारी दीपक वाजपेयी ने हिस्सा लिया। कुमार विश्वास बैठक में नहीं पहुंचे थे। जानकारों के अनुसार पीएसी की बैठक में कानून पहलुओं पर चर्चा करने के लिए राहुल मेहरा और सिद्धार्थ लूथरा जैसे वकीलों को भी बुलाया गया था लेकिन पार्टी नेता किसी तरह की कानूनी राय लिये जाने से ही इन्कार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि वकीलों ने राय दी कि पार्टी से विरोधी नेताओं को सीधे निकालना सही नहीं है। इसे अदालत और चुनाव आयोग में चुनौती दी जा सकती है जिससे मामला फंस सकता है। उधर, पार्टी की कार्रवाई की चिंता किए बगैर बुधवार को बागी गुट के नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने आनंद कुमार को स्वराज अभियान का राष्ट्रीय संयोजक घोषित कर दिया। स्वराज अभियान के माध्यम से आगे दो माह के दौरान देशभर में 30 से 35 स्वराज संवाद सभाओं और लगभग सभी जिलों में स्वराज यात्रा का आयोजन किया जायेगा।
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