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Editorial

आफत के बाद राहत

April 10, 2015 02:59 PM

संपादकीय/महावीर गोयल! बिगड़े मौसम ने रबी की फसल को कितनी क्षति पहुंचायी है, खेतों में गिरे पड़े गेहूं के पौधे इसे बयां करने के लिए काफी हैं। गनीमत है कि अन्नदाता के इस नुकसान को केंद्र सरकार ने समझा है। खेतों में खड़ी पकी फसल पर कुदरत ने इस बार जो कहर बरपाया सचमुच वह बहुत बड़ा नुकसान है। किसान इसे देखकर दुखी होने के सिवाय क्या कर सकता है। कुछ किसान तो इस सदमे से उबर नहीं पाए और हृदयाघात ने उनकी जान ले ली। कहीं-कहीं आर्थिक संकट से जूझते किसानों के आत्महत्या करने की भी घटनाएं हुईं। राज्य सरकार ने  किसानों की क्षति के सर्वे करने के निर्देश दिएए लेकिन नौकरशाही अपने हिसाब से चली और क्षति का सही आकलन नहीं किया। गनीमत है कि केंद्र सरकार ने इसका संज्ञान ले लिया है। उसने न केवल किसानों को मुआवजे में मिलने वाली राशि में डेढ़ गुना बढ़ोत्तरी की है बल्कि यह भी ऐलान किया है कि जिन किसानों की 33 प्रतिशत फसल का भी नुकसान हुआ है, उसे भी केंद्र सरकार मुआवजा देगी। अभी तक मानक यह था कि जिन किसानों की 50 फीसदी या इससे ज्यादा फसल का नुकसान होता था, सरकार उसे मुआवजा देती थी। लेकिन यह पहला अवसर है जब केंद्र सरकार ने 33 प्रतिशत फसल के नुकसान पर भी किसानों को मुआवजा देने की घोषणा की है। इतना ही नहीं, उसने बीमा कंपनियों को किसानों के दावे निपटाने के लिए सक्रियता दिखाने और बैंकों से सरकारी मदद हासिल करने के लिए मानदंड उदार करने को कहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बैंकों से मौसम की मार से प्रभावित किसानों के कृषि ऋण के पुनर्गठन करने को कहा है। यह बात किसानों के हित में है कि सरकार उसकी पीड़ा को महसूस कर रही है और उसे राहत पहुंचाने के लिए सक्रिय हो गई है। किसानों से सरकार को सहानुभूति है,  यह बात तो साफ  हो गई है लेकिन सरकारी मशीनरी भी उतनी ही ईमानदारी के साथ किसानों का साथ देगी, अभी यह साबित होना है। अधिकांशत:्र होता यह है कि सरकार जो सहायता केंद्र से जारी करती है, वह पात्रों तक आते-आते काफी कम हो जाती है अथवा उसमें इतना विलंब होता है कि उस राहत के मिलने और न मिलने की बात बराबर हो जाती है। सरकार ने निर्देश दे दिए हैं लेकिन उसे अभी यह भी देखना है कि का बरसा जब कषि सुखाने वाली बात न हो जाए। उसने जिन राहतों के निर्देश दिए हैं, उन राहतों का किसानों तक समय से पहुंचना भी जरूरी है। समय पर चिकित्सा ही मरीज को जीवन दान देती है। किसान इस समय बेहाल है और उसे समय पर मदद न मिली तो उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

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