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जीवा आयुर्वेद ने आयुर्वेद डायग्नोस्टिक प्रोटोकॉल लॉन्च किया

July 16, 2018 06:26 PM

इंडिया केसरी/पूजा शर्मा/फरीदाबाद : आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए लगभग 10 लाख रोगियों के रोग विश्लेषण के आधार पर पिछले 6 वर्षों की मेहनत के उपरान्त जीवा आधुनिक प्रोटोकॉल्स तैयार किए गए हैं। डॉक्टर्स को रोगी के लिए सटीक निदान व गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने में सहायक ये प्रोटोकॉल आयुर्वेद के लिए उन्नत डि़सीजन सर्पोट इन्जिन है जिसमें प्रेडिक्टिव अल्गोरिद्म, मशीन लर्निंग व आर्टीफिशियल इन्टेलीजेन्स का प्रयोग किया गया है। आयुर्वेद के डाटा ड्राइवन-स्टैन्डर्ड़राइजेशन में यह बहुत महत्त्वपूर्ण कदम है।मशीन लर्निंग आधारित व्यक्तिगत जानकारी, आयुर्वेदिक टेस्ट व असेसमेंट टूल्स जैसी विशेषताओं से युक्त जीवा हैल्थ एप को भी लॉन्च किया।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में जीवा आयुर्वेद ने ‘‘जीवा आयुनीक प्रोटोकॉल‘‘ लॉन्च किया जिसका उद्देश्य है विश्व स्तर पर आयुर्वेद चिकित्सा को एक चिकित्सा विज्ञान के रुप में स्वीकार्यता दिलाना। ये नवनिर्मित प्रोटोकॉल विस्तृत डाटा-विश्लेषण के परिणामस्वरूप पिछले 6 वर्षों की निरन्तर मेहनत के उपरान्त तैयार किए गए है। ‘‘बिग डाटा-विश्लेषण‘‘ व ‘मशीन लर्निंग‘ तकनीक के उपयोग से 5000 वर्ष पुराने आयुर्वेद ज्ञान व लाखों रोगियों के व्यक्तिगत उपचार के रिाकॉर्ड के आधार पर जीवा ने आयुर्वेद डॉक्टर्स के लिए यह उन्नत व अग्रणी डि़सीजन सर्पोट सिस्टम को तैयार किया है। यह डॉक्टर्स को स्टैन्डर्डराइजेशन व डाटा-ड्राईवन तकनीक से रोग के मूल कारण के निदान व व्यक्तिगत चिकित्सा में सहायक सिद्ध होगा। जीवा आयुर्वेद के डायरेक्टर डॉ प्रताप चौहान ने कहा किआयुर्वेद मूलत: व्यक्तिगत उपचार पर आधारित विज्ञान है जो विश्व की लक्षण आधारित उपचार की समस्या को दूर करने में पूर्ण सक्षम है। जीवा आयुनीक प्रोटोकॉल आयुर्वेद प्रेक्टिस के लिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह है जिसमें आयुर्वेदिक सिद्धान्त और डाटा रिकॉर्ड का सार सम्मिलित किया गया है। यह आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर सटीक व व्यक्तिगत चिकित्सा विज्ञान के रूप पर पहचान दिलाने के क्रम में महत्त्वपूर्ण व उपयोगी साबित होगा। जीवा गु्रप के प्रेसीडेंट ऋषिपाल चौहान ने बताया कि दुनियाभर में आयुर्वेद चिकित्सकों को ‘हैल्थ व वैलनेस कोच‘ के रूप में जाना जाता है क्योंकि आयुर्वेद को एक चिकित्सा विज्ञान के रुप में नहीं जाना जाता। जीवा आयुनीक प्रोटोकॉल इस मानसिकता को बदलने की ओर एक मजबूत व महत्त्वपूर्ण कदम है। आयुर्वेद को पूर्ण विज्ञान के रुप में विश्व स्तर पर पहचान व स्वीकृति मिलने से ही ‘हैल्थ फॉर ऑल‘ के स्वप्न को साकार किया जा सकता है।
जीवा आयुनीक प्रोटोकॉल को 25,000 से अधिक रोगियों पर आजमाया जा चुका है। जीवा आयुनीक प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए जीवा ने कई यूनिवर्सिटीज व इंस्टीट्यूट्स के सहयोग से आगे रिसर्च की योजना बनाई है। जीवा हैल्थ एप को भी लॉन्च किया गया जो व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर शास्त्रीय व कारगर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देता है। विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रताप चौहान ने इसमें काफी महत्त्वपूर्ण जानकारी दी है। स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति इसमें स्वास्थ्य संबंधी कई जानकारियाँ प्राप्त कर सकता है। यह एप रोगियों को जीवा डॉक्टर से परामर्श व चिकित्सा की सुविधा भी प्रदान करेगा। एक ही जगह पर अपनी ट्रीटमेंट हिस्ट्री का रिकॉर्ड भी आसानी से जान सकता है। यह एप गूगल प्ले स्टोर व एपल एप स्टोर पर उपलब्ध है।
जीवा-परिचय: आधुनिक परिवेश में चिकित्सा व स्वास्थ्य के प्राचीन वैदिक विज्ञान को पुनजीवित करते हुए एक स्वस्थ, प्रसन्न व शांति-पूर्ण समाज की स्थापना करने के उद्देश्य से जीवा आयुर्वेद की नींव 1992 में रखी गई थी। हर घर आयुर्वेद को पहुँचाने के मिशन की शुरुआज डॉ0 प्रताप चौहान ने एक सामान्य से क्लीनिक के साथ की थी जो आयुर्वेद के क्षेत्र में आज एक अग्रणी व विश्वसनीय नाम बन चुका है। जीवा मेडिक़ल एवं रिसर्च सेन्टर विश्व के सबसे बड़े आयुर्वेदिक टेलीमेडि़सिन सेन्टर में से एक है। प्रतिदिन 8,000 से अधिक रोगियों को लगभग 500 आयुर्वेदिक डॉक्टर्स व हैल्थ केयर प्रोफेशनल्स द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती है। पूरे भारत में 16 से अधिक राज्यों में जीवा के 75 से अधिक क्लीनिक हैं

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