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सोहना:नगरपरिषद विभाग के 13 गांवो की पंचायती भूमि पर पंचायतों का कब्जा

January 03, 2017 05:55 PM

सोहना:सोहना नगरपरिषद विभाग के अन्तर्गत आने वाले 13 गांवो की पंचायती भूमि पर पंचायतों का कब्जा हैं। सरकार ने अढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी उक्त भूमि को परिषद के अधीन नहीं किया हैं। ऐसी पंचायती भूमि का राजस्व रिकार्ड वर्तमान में ग्राम पंचायतों के नाम दर्ज हैं। जिसकी कीमत करोडों रूपये बताई जाती हैं। वहीं नगरपरिषद विभाग ने पंचायती भूमि को परिषद में मर्ज करने के लिए कई बार लिखित पत्र तहसीलदार सोहना को प्रेषित किया हैं। किन्तु राजस्व विभाग ने आजतक भी भूमि का इंतकाल परिषद के बाद दर्ज नहीं किया हैं। उल्लेखनीय हैँ कि गत 5 सितम्बर 2014 को सोहना नगरपालिका का दर्जा बढाकर नगरपरिषद कर दिया गया था। जिसमें सरकार द्वारा 13 गांवो को शामिल किया था। ऐसे गांवो में रायपुर, बालूदा, धुनेला, बेरका, लोहटकी, सिरसका, जखोपुर, सोहना ढाणी, सांप की नंगली, खाईका इत्यादि शामिल थे। सरकार ने उक्त गांवो के समस्त रिकार्ड खाते, नकदी, फर्नीचर, पंचायती भूमि आदि को नगरपरिषद सोहना के अधीन कर डाला था। किन्तु हैरत की बात हैं करीब अढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी ऐसे गांवो की पंचायती भूमि को आज तक भी नगरपरिषद के रिकार्ड में तबदील नहीं किया गया हैं। ऐसी भूमि वर्तमान में भी राजस्व रिकार्ड में ग्राम पंचायतों के नाम पर दर्ज हैं। जिसका कुल रकबा करीब 200 एकड बताया जाता हैं।
क्या कहते है अधिकारी
नगरपरिषद के भवन निरिक्षक प्रदीप कादियान ने बताया कि परिषद पंचायती भूमि का इंतकाल दर्ज कराने के लिए चार बार लिखित पत्र तहसीलदार को प्रेषित कर चुका हैं। किन्तु आज तक भी परिषद के नाम भूमि का मुटेशन दर्ज नहीं हो सका हैं। उन्होंने बताया कि मात्र बालूदा गांव की भूमि का इंतकाल नगरपरिषद सोहना के नाम दर्ज किया गया हैं। जबकि 12 गांवो की पंचायती भूमि रिकार्ड अनुसार ग्राम पंचायतों के नाम चली आती हैं।


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