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Chandigarh

चंडीगढ़:एसवाईएल पर प्रदेश के हितों की रक्षा करने में विफल रहे सीएम:चौटाला

December 30, 2016 06:32 PM

चंडीगढ़: इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला और अशोक अरोड़ा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री पर एसवाईएल जैसे गम्भीर मुद्दे पर प्रदेश के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री मिलने के लिए समय तक न दे उसे अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत अपने पद से त्याग पत्र दे देना चाहिए। इनेलो नेताओं ने प्रकाशोत्सव पर आयोजित नगर कीर्तन प्रारंभ होने के अवसर पर आज यहां पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि मुख्यमंत्री एसवाईएल पर प्रदेश के हितों की लड़ाई लडऩे में बेहद कमजोर साबित हुए हैं और अब इनेलो प्रदेश के लोगों को साथ लेकर एसवाईएल पर अपने बलबूते पर लड़ाई लड़ेगी। इस अवसर पर पूर्व कृषि मंत्री जसविंदर सिंह संधू सहित अनेक प्रमुख इनेलो नेता मौजूद थे।इनेलो नेताओं ने कहा कि एसवाईएल के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और उस बैठक में मामले की गम्भीरता को देखते हुए यह तय किया गया था कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय प्रतिनिधिमण्डल जल्दी ही प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति से मिलेगा और उनसे मिलने का समय मुख्यमंत्री तय करेंगे। राष्ट्रपति ने तो तुरंत मिलने का समय भी दे दिया और सर्वदलीय प्रतिनिधिमण्डल राष्ट्रपति से तो मिलकर अपनी बात भी उनके समक्ष रख आया था। अब करीब डेढ महीने का समय हो गया है मुख्यमंत्री को अभी तक प्रधानमंत्री ने मिलने का समय भी नहीं दिया है। जिससे साफ है कि प्रधानमंत्री हरियाणा के मुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री ही नहीं मानते हैं। ऐसे में जिस सीएम को प्रधानमंत्री मिलने का समय न दे उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत अपना पद छोड़ देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब अगर प्रधानमंत्री सीएम को मिलने का समय दे भी देते हैं तो हम उनके साथ मिलने नहीं जाएंगे क्योंकि मुख्यमंत्री के हाथों में हरियाणा के हित सुरक्षित नहीं हैं और उनकी पार्टी एसवाईएल को लेकर लोगों के समर्थन से अपने बलबूते पर लड़ाई लड़ेगी। इनेलो नेता ने कहा कि एक तरफ सरकार सबका साथ सबका विकास और हरियाणा एक हरियाणवी एक जैसे नारे दे रही है वहीं दूसरी ओर नौकरियों की बंदरबांट में भाजपा सरकार कांग्रेस से भी चार कदम आगे निकल गई है। इनेलो नेता ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्रमुख सलाहकारों, विभिन्न अकादमियों के अहम पदो, सुशासन सहयोगियों व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर प्रदेश से बाहर के लोगों को नियुक्त कर रही है। उन्होंने कहा कि एक कमरे में बैठकर लोगों की नियुक्ति सूचियां तैयार कर ली जाती हैं और चुपचाप उन्हें नियुक्त कर दिया जाता है। उन्होंने मछली पालन विभाग में नियुक्तियों मेें हुए घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जल्द ही एक पत्रकार सम्मेलन करके सरकार की इन सभी नियुक्तियों व अनियमितताओं का खुलासा करेंगे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग में भाजपा से जुड़े  हुए एक ठेकेदार को सलाहकार नियुक्त किए जाने पर भी सवालिया निशान लगाया।सवालों के जवाब में इनेलो नेता ने कहा कि उनके द्वारा खेलों के विकास में दिए गए योगदान के प्रति उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ का  आजीवन अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि इनेलो सरकार के समय उन्होंने हरियाणा ओलंपिक संघ के अध्यक्ष व भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अध्यक्ष के नाते खेलों व खिलाडिय़ों के हित में अनेक ऐसी योजनाएं व नीतियां बनाई जिसका अनुसरण बाद में पूरे देश के अन्य राज्यों ने भी किया। जिसमें खिलाडिय़ों को नगद इनाम व अच्छे पदों पर नौकरियां दिए जाने की नीति भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि उन्हें आजीवन अध्यक्ष बनाने पर आज जो लोग ऊंगली उठाते हैं उन्हें पहले ये भी बताना चाहिए कि  खेलों व खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने संबंधी उनका क्या योगदान रहा है? उन्होंने आईओए की बैठक में यह भी मांग की थी कि जिन खेल संघों ने राज्यस्तरीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय स्तरीय खेलों के आयोजन निरंतर नहीं किए और जो केवलमात्र कागजी संगठन बनकर रह गए हैं उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ से दी गई मान्यता वापिस ले लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस बारे में ओईओए से एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर सभी खेल संगठनों की गतिविधियों का पता लगाए जाने की भी मांग की थी। अभय सिंह चौटाला ने एक बार फिर दोहराया कि केंद्रीय खेल मंत्री को सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए जो जिम्मेदारी सौंपी है उन्हें उस पर ध्यान देना चाहिए न कि कोई नया विवाद खड़ा करना चाहिए। इनेलो नेता ने कहा कि केंद्रीय खेल मंत्री को आईओए अपने अधीन करने की बजाय नए खेल मैदान, कोच, ट्रेनर, स्टेडियम, तकनीकी स्टाफ पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि खेलों को बढ़ावा मिल सके और इस बारे में उन्हें विभिन्न खेल संगठनों के साथ भी मिल बैठकर विचार करना चाहिए ताकि देश के खिलाड़ी दुनिया में अच्छा नाम कमा सकें। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद किसी भी खेल संगठन में सरकारी हस्तक्षेप के पूरी तरह खिलाफ है और एशियाई, कॉमनवेल्थ व ओलंपिक जैसे खेलों में आईओए ही टीमें भेजने के लिए अधिकृत है। उन्होंने कहा कि एक बार यूके की सरकार ने अपने स्तर पर टीम भेजनी चाहिए थी जिसे आईओसी ने मंजूरी नहीं दी। उन्होंने कहा कि खेल मंत्री का आईओए को लिखा मौजूदा धमकी वाली भाषा का पत्र भी खेल संगठनों के कामकाज में सरकारी दखल है और इस बारे में भी आईओसी को संज्ञान लेना चाहिए।

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